दोस्त और प्यार कभी भी जबरदस्ती नहीं बनाए जाते, ये अपने आप ही बन जाते हैं, इसलिए जबरदस्ती ना करें

2 months ago admin 0

एक साल पहले मैंने कॉलेज में एक लड़की से फ्रेंडशिप के लिए पूछा उसने हां भी बोल दिया। लेकिन वो 2 महीने बाद मुझसे गुस्सा हो गयी। मैंने उसे मनाने कि कोशिश की लेकिन उल्टा उसने मुझ में ही गलती निकाल दी और मुझे कभी कोंटेक्ट न करने को कहा और न ही मैसेज और कॉल करने को भी कहा। यहां तक बात करने से भी मना कर दिया, लेकिन फिर भी मैंने उसे मनाने कि कोशिश कि क्योंकि मेरे लिए उसकी फ्रेंड्शिप कि ज्यादा कीमत थी।  मैंने कहा मैं तेरी बहुत रिस्पेक्ट करता हूं।  उसकी फ्रेंड ने भी ये बात समझाने कि बहुत कोशिश कि थी, लेकिन वो नहीं मानी।  मैंने भी कहा कि देख लाईक और प्यार वाला चक्कर नहीं है, बस मुझे तेरा नेचर अच्छा लगता है और मैं तुम्हें बहुत अच्छा दोस्त मानता हूं और मैं किसी के सामने बात करने नहीं आता। क्योंकि मैं नहीं चाहता कि मेरी वजह से तुम्हारा नाम खराब हो।  वो कहने लगी तू मुझे ऐसे ही परेशान कर रहा है ऐसी बातें बोलकर मैंने कहा कि बाकी तेरी मर्जी है लेकिन अब तो हद हो गयी है।  कॉलेज में ऐसा ही एक लड़का है। उसकी क्लास में उसकी कुछ भी इज्जत नहीं है सब उसकी बेइज्जती करते है।  हम सब एक ही क्लास में हैं और एक ही व्हात्सप्प ग्रुप में जुड़े हुए हैं और उस ग्रुप में एक लड़के ने ऐसे ही उसका नाम ग्रुप में मैसेज कर दिया और मैंने उस लड़की को फोन किया और कहा कि अब देख तेरा नाम खराब कौन कर रहा है।  उसे किसी कि रिस्पेक्ट कि कोई चिंता नहीं है लेकिन उस लड़की ने मुझे मैसेज किया कि मेरी मर्जी यही है कि मैं तुमसे दोस्ती नहीं करना चाहती बस और जो पहले बोला था वो मजबूरी में बोला था।  तुम्हें मेरे मैटर में बोलने कि कोई जरूरत नहीं है। अब मुझे क्या करना चाहिए?