24 फरवरी को दुबई के होटल में बाथटब में डूबने से एक्ट्रेस श्रीदेवी की मौत हो गई थी और 28 फरवरी को मुंबई में राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया।अब बृहस्पतिवार को बोनी कपूर ने हरिद्वार में पत्नी श्रीदेवी की अस्थियां विसर्जित की। गौरतलब है कि इससे कुछ दिन पहले ही बोनी कपूर ने रामेश्वरम में भी श्रीदेवी की अस्थियों को प्रवाहित किया था। कई लोगों ने सवाल भी उठाए कि उन्होंने ऐसा क्यों किया? आपकों बता दे, कि हरिद्वार और रामेश्वरम में दो जगहों पर श्रीदेवी की अस्थियां विसर्जित करने के पीछे तीन बड़ी वजहे हैं…

हिन्दू धर्म की धार्मिक मान्यता

हिन्दू धर्म के मान्यता के अनुसार मृतक की आत्मा की शांति के लिए अंतिम संस्कार के बाद अस्थियों को काशी या रामेश्वरम में विसर्जित किया जाता है। दरअसल एक्ट्रेस श्रीदेवी तमिल ब्राह्मण थीं। उनका जन्म तमिलनाडु के शिवकाशी प्रांत में हुआ था। इसलिए तमिलनाडु स्थित रामेश्वरम में उनका परिवार पहुंचा। ऐसा माना जाता है कि रामेश्वरम (अग्नि तीर्थम) में अस्थियों को विसर्जित करने से मृत व्यक्ति के सारे पाप धुल जाते हैं और उसे मोक्ष कि प्राप्ति हो जाती है। इसका बात का जिक्र रामायण में भी है जब लंका से लौटते वक्त श्रीराम के कहने पर सीता ने पहली बार रामेश्वरम में अग्नि परीक्षा दी थी। तब अग्नि देव ने अपने इस पाप से मुक्ति पाने के लिए इसी जगह पर स्नान किया था। तब भगवान शिव ने यह वरदान दिया था कि यहां स्नान करने से व्यक्ति के सारे पाप नष्ट हो जाएंगे और अस्थियां विसर्जित होने से आत्मा को मुक्ति मिलेगी।

हरिद्वार जाने की थी इच्छा

साल 1993 में एक फिल्म की शूटिंग के दौरान एक्ट्रेस श्रीदेवी कुछ समय के लिए हरिद्वार में रुकी थीं। शूटिंग के दौरान यहां से गुजरते हुए श्रीदेवी ने फिल्म यूनिट के साथ हरिद्वार में रुकने की इच्छा जाहिर की थी।उस वक़्त  श्रीदेवी ने मां गंगा का आशीर्वाद लेकर दोबारा हरिद्वार आने की इच्छा जताई थी, लेकिन फिर वो कभी हरिद्वार नहीं आ पाईं। हिंदू धर्म में अस्थियों के एक हिस्से को आत्मा की शांति के लिए किसी अन्य स्थान पर भी विसर्जित किया जा सकता है। इसलिए श्रीदेवी की इच्छा पूरी करने के लिए बोनी और अनिल कपूर हरिद्वार में शांति पाठ कराने पहुंचे थे|

खानदानी रीति

कपूर खानदान के जो तीर्थ पुरोहित है वह हरिद्वार में हैं। ऐसा माना जाता है कि मरने के बाद अस्थि विसर्जन और श्राद्ध के लिए तीर्थ पर जाना पड़ता है। श्रीदेवी से पहले हरिद्वार में कपूर खानदान के कई और सदस्यों की भी अस्थियां विसर्जित कि जा चुकी हैं। तीर्थ पुरोहित शिवकुमार के अनुसार इससे पहले बोनी कपूर 1988 में अपने दादा लालचंद और 2011 में अपने पिता सुरेंद्र कपूर और अपनी पहली पत्नी मोना की अस्थियां गंगा में विसर्जित करा चुके हैं।

 

 

 

 

 

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