इस काल मेें भूलकर भी ना करें होली पूजन, वरना हो सकती है बड़ी हानि

2 months ago admin 0

होली की तैयारी जोर-शोर से चल रही है बजारो में काफी हलचल हो रखी है होली एक ऐसा त्योहार है जहां दुश्मन भी दोस्त बन जाते है। वैसे तो होली का दहन के बाद भी रंग खेला जाता है। इसके पिछे की कहानी तो सब ही जानते है कि एक राक्षस था हिरण्यकशियप जिसके बैटे थे प्रहदाल वो श्री हरी के बहुत बड़े भगत थे लेकिन उनके पति उनके सबसे बड़े शत्रु इसलिए उन्होंने अपनी बहन को कहा कि वो अपनी देवतों के द्वारा दी गई चूनी पहनकर और उनके बैटे को हवन कुड़ में लेकर बैठ जाए ताकि उनका पुत्र की मृत्यु खत्म हो जाए लेकिन प्रहलाद की जगह उनकी बहन होलीका ही उस हवन कुड़ में खत्म हो जाती है जिसके बाद से ही होली का त्यौहार बनना शुरू किया। लेकिन क्या आप जानते है कि होली पुजन के लिए भी मुहूर्त होता है। आज हम बताते है कि आज के दिन आप किस मुहूर्त में होली की पुजा कर सकते है जिससे आपके घर में खुशहाली आएगी।

जैसे की आपकी दादी नानी आपको बताती थी कि भद्रा काल में कोई भी शुभकाम नहीं करना चाहिए आपके मन भी एक सवाल आता होगा कि क्यों नहीं करना चाहिए। तो हम बताते है कि क्यों आपके बड़े बुर्जग आपको ऐसा कहते थे। ज्योतिषों के अनुसार भद्रा भगवान सूर्य की बेटी शनिदेव की बहन थी। ऐसी मानयता है कि उनका रूप बहुत ही भयंकर था। इसलिए ब्रह्मा जी ने इन्हें काल गणना में विशेष स्थान दिया है। कहा जाता है कि दैत्यों को मारने के लिए इनता जन्म हुआ था। भद्रा भदर्भ यानी गधे के मुंह,पूछ और तीन पैर युक्त पैदा हुई थी। पंडित बताते है कि भद्रा का रूप काले वर्ण का था साथ ही उनके लंबे बाल और बड़े दांत थे। जैसे ही उनका जन्म हुआ उसके बाद से सारे शुभ कार्यों में वो विघ्न डालने लगी थी। ऐसी मानयता है कि जब सूर्य देव को अपनी पुत्री भद्रा की शादी की चिंता होने लगीष तो वो ब्रह्मा जी से इसका उपाय मांगने गए। तब ब्रह्माजी ने उन्हें बालव और कौल जैसे स्थानों पर रहने के लिए कहा और कहा कि जो व्यक्ति तुम्हारे समय में शुभ कार्य करेगा उसके काम को तुम्हें बिगडना होगा। जिसके बाद से वो दुष्ट दानवों का नाश करने लगी। उस वक्त से ही भद्रा काल में कोई भी शुभ काम नहीं किया जाता है। आपको बता दें कि, आज सुबह 8.57 मिनट से शाम को 7.40 मिनट तक भद्रा रहेगी। इसलिए आप शाम 7 बजे के बाद ही पुजा या कोई भी शुभ काम करें।